धर्मशास्त्र
प्रेम
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प्रेम
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सबसे बड़ा प्रेम
इससे बड़ा प्रेम किसी का नहीं की कोई अपने मित्रों के लिए अपना प्राण दे
यूहन्ना १५ : १३
परमेश्वर का अपार प्रेम
क्यूँकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया की उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया ताकि जो कोई उसपर विश्वास करे वो नाश ना हो परन्तु अनंत जीवन पाए
युहन्ना ३:१६
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